
मज़बूत हूँ...
मैं मज़दूर हूँ साहब
कुछ ये कहते हैं
मजबूर हूँ.....
पूर्ण सत्य नही
अर्द्धसत्य ही सही
श्रम बिंदु के अपमान से
मजबूर हूँ......
मेरे हाथों ने गढ़े
आकाश सी बुलंदियां
मगरूर तुम हुए
मजबूर हूँ....
तरबतर देह में
आंसुओं की लकीर
नज़र न आए
मजबूर हूँ
कि
मजबूत हूँ......
रोशन साहू (शिक्षक)

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