साहित्य अउ संस्कृति के सुघ्घर  मेल दिखथे हमर अंचल मा
मोहम्मद रफी सुरता - अजी ऐसा मौका फिर कहाँ मिलेगा
संपादकीय - छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारी नरवा ,गरुवा , घुरुवा , बारी
 रिलोगीत - छत्तीसगढ़ का जनजातीय विवाह गीत
 संपादकीय - बेरा आगे मेला मड़ई के
कविता के लगइस सुग्घर थरहा : विश्वंभर यादव "मरहा "
मातर विशेष - मातर पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं
13 नवंबर 2020 मुक्तिबोध जयंती पर आलेख